Friday, May 9, 2008

गम को भूल जाऊँ

ज़िंदगी ने धाए हैं मुज पर लाखो सितम
हस कर सह लेता ह में ये सारे गम
न जाने कब खत्म हो जाए ये जनम
इसीलिए हसी में उड़ देता ह में गम

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